बालाजी की आरती — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और वो नियम जो हर भक्त को जानने चाहिए
एडमिन-3 द्वारा / 1 मार्च, 2026
बालाजी की आरती इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
हिंदू धर्म में भगवान वेंकटेश्वर यानी बालाजी की आरती को सबसे शक्तिशाली और सबसे जल्दी फल देने वाली आरतियों में से एक माना जाता है। तिरुपति बालाजी के दर्शन तो लाखों लोग करते हैं लेकिन घर में बालाजी की आरती नियमित रूप से करने से भगवान की कृपा घर में ही उतर आती है। जो लोग हर मंगलवार और शनिवार को बालाजी की आरती करते हैं उनके जीवन में धन, सुख और समृद्धि की कोई कमी नहीं रहती। आज इस लेख में हम आपको बालाजी की सम्पूर्ण आरती, उसका अर्थ और सही विधि देंगे।
॥ श्री बालाजी की आरती ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तन-मन-धन सब तेरा, क्या लागे मेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
॥ इति श्री बालाजी आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ श्री वेंकटेश्वर बालाजी की विशेष आरती ॥
जय जय श्री वेंकटेश, लक्ष्मी निवास।
भक्तों के मन मंदिर में, करो वास॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
सात पहाड़ों पर विराजे, तिरुपति बालाजी।
दर्शन करने आते हैं, सब नर-नारी॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
शंख-चक्र-गदा-पद्म, हाथों में धारे।
श्रीदेवी-भूदेवी सहित, मन को निहारे॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
लड्डू का भोग लगाओ, प्रसाद पाओ।
सच्चे मन से बालाजी, शीश नवाओ॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
कलयुग में तुम दाता, सब विधि दाता।
जो तेरे द्वार आए, खाली न जाता॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
भक्तों की पीड़ा हरो, भव से उबारो।
अपनी शरण में लेकर, मुक्ति दिलाओ॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
जय जय श्री वेंकटेश, लक्ष्मी निवास।
सदा बनाए रखना, अपनी कृपा खास॥
जय जय श्री वेंकटेश॥
॥ इति श्री वेंकटेश्वर बालाजी आरती सम्पूर्णम् ॥
आरती का अर्थ — हर पंक्ति का भाव जानें
पहली पंक्ति में कहा गया है कि हे जगत के स्वामी हरि — आप भक्तों के सभी संकट पल भर में दूर कर देते हैं। यह पंक्ति भगवान की असीम करुणा और शक्ति का वर्णन करती है। दूसरी पंक्ति का भाव है कि जो भक्त आपका ध्यान करता है उसे मनवांछित फल मिलता है, दुख दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। तीसरी पंक्ति में भक्त कहता है कि हे प्रभु आप ही मेरे माता-पिता हैं, आप ही मेरा सहारा हैं — आपके बिना मेरी कोई आस नहीं। चौथी पंक्ति में भगवान को पूर्ण परमात्मा और अंतर्यामी कहा गया है — अर्थात वो हर जगह हैं और हर भक्त के मन की बात जानते हैं। पांचवीं पंक्ति में भगवान को करुणा का सागर और पालनकर्ता कहकर उनसे कृपा की याचना की गई है। छठी पंक्ति में भक्त अपनी कुमति यानी सीमित बुद्धि को स्वीकार करते हुए भगवान से मिलने का मार्ग मांगता है। सातवीं पंक्ति में दीनबंधु यानी गरीबों के मित्र भगवान से प्रार्थना की गई है कि वो अपना हाथ उठाकर भक्त की रक्षा करें। आठवीं पंक्ति में विकारों और पापों से मुक्ति और भक्ति की वृद्धि के लिए प्रार्थना है। अंतिम पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है जिसमें भक्त कहता है कि तन-मन-धन सब तेरा है — जो तूने दिया वो तुझे ही अर्पित है।
बालाजी आरती की सही विधि — इन 5 नियमों का पालन जरूरी है
पहला नियम — बालाजी की आरती हमेशा स्नान के बाद और स्वच्छ वस्त्रों में करें। भगवान वेंकटेश्वर को शुद्धता अत्यंत प्रिय है और अशुद्ध अवस्था में की गई आरती का फल नहीं मिलता।
दूसरा नियम — आरती के समय घी का दीपक और कपूर की आरती दोनों जलाएं। कपूर की आरती बालाजी को विशेष प्रिय है और इससे वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
तीसरा नियम — आरती करते समय शंख अवश्य बजाएं। शंख की ध्वनि से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान बालाजी का आगमन होता है। शंख न हो तो घंटी भी बजा सकते हैं।
चौथा नियम — आरती के बाद भगवान को लड्डू का भोग जरूर लगाएं। बालाजी को लड्डू अत्यंत प्रिय है और बिना भोग के आरती अधूरी मानी जाती है। तिरुपति वाले लड्डू मिलें तो उत्तम हैं — नहीं तो घर में बने बेसन के लड्डू भी चढ़ा सकते हैं।
पांचवां नियम — आरती के बाद भगवान के चरणों में साष्टांग प्रणाम करें यानी पूरे शरीर को जमीन पर लिटाकर प्रणाम करें। यह विनम्रता का सर्वोच्च भाव है जो भगवान बालाजी को अत्यंत प्रिय है।
बालाजी आरती का सही समय — इस वक्त करने पर मिलता है दोगुना फल
बालाजी की आरती के लिए सुबह और शाम दोनों समय उत्तम हैं। सुबह सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुख करके की गई आरती दिन भर की सकारात्मक ऊर्जा देती है। शाम को सूर्यास्त के बाद घी का दीपक जलाकर की गई आरती घर में धन और समृद्धि लाती है। मंगलवार और शनिवार को बालाजी की आरती का विशेष महत्व है — इन दिनों की गई आरती से शनि दोष और मंगल दोष दोनों का प्रभाव कम होता है। एकादशी के दिन बालाजी की विशेष आरती करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
बालाजी आरती के साथ करें यह 3 उपाय — भगवान तुरंत प्रसन्न होंगे
पहला उपाय — हर शनिवार को बालाजी मंदिर में जाकर तिल के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ नमो वेंकटेशाय” का 108 बार जाप करें। यह उपाय कर्ज से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
दूसरा उपाय — घर में बालाजी की तस्वीर उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं और हर दिन सुबह उठते ही उनके दर्शन करें। मान्यता है कि सुबह उठकर सबसे पहले बालाजी का दर्शन करने वाले भक्त पर उस पूरे दिन भगवान की विशेष कृपा रहती है।
तीसरा उपाय — अगर जीवन में कोई बड़ी परेशानी हो तो तिरुपति की मन्नत मांगें और जब मनोकामना पूरी हो तो तिरुपति बालाजी के दरबार में जाकर बाल दान करें। यह परंपरा सदियों पुरानी है और करोड़ों भक्तों ने इसका अनुभव किया है।
अगर अभी तक नहीं की बालाजी की आरती तो आज से ही शुरू करें
जो लोग नियमित रूप से बालाजी की आरती करते हैं वो बताते हैं कि उनके जीवन में एक अदृश्य बदलाव आया — संकट दूर हुए, धन आया, घर में शांति आई और मन को एक ऐसी शक्ति मिली जो हर मुश्किल में काम आती है। तो आज ही घर में बालाजी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें, घी का दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा के साथ बालाजी की आरती करें। क्योंकि जब कलयुग के दाता भगवान वेंकटेश्वर की कृपा होती है तो न दुख टिकता है, न संकट टिकता है — बस जीवन में हर तरफ से सुख और समृद्धि का वास होता है।
नोट: इस लेख में दी गई आरती और जानकारी धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है। आरती का पाठ सदैव शुद्ध मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ करें।
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