प्रेतराज सरकार की आरती — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और वो नियम जो हर भक्त को जानने चाहिए

प्रेतराज सरकार की आरती — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और वो नियम जो हर भक्त को जानने चाहिए


एडमिन-3 द्वारा / 1 मार्च, 2026


प्रेतराज सरकार की आरती इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

हिंदू धर्म में यमराज और उनके दूतों की पूजा का विधान बहुत कम लोग जानते हैं — लेकिन जो जानते हैं वो यह भी जानते हैं कि प्रेतराज सरकार की आरती और पूजा से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, पितृ दोष शांत होता है और घर में भटकती आत्माओं का प्रभाव समाप्त होता है। प्रेतराज सरकार को उन आत्माओं का स्वामी माना जाता है जो किसी कारण से मोक्ष नहीं पा सकीं और भटक रही हैं। जिन घरों में बार-बार अशुभ घटनाएं होती हैं, जहां पितृ दोष है, जहां परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई हो — ऐसे में प्रेतराज सरकार की आरती और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। आज इस लेख में हम आपको प्रेतराज सरकार की सम्पूर्ण आरती, उसका अर्थ और सही विधि देंगे।


॥ प्रेतराज सरकार की आरती ॥


जय प्रेतराज सरकार, जय प्रेतराज सरकार।
भक्तों के दुख हरते, जय प्रेतराज सरकार॥
जय प्रेतराज सरकार॥

यम यमराज तुम्हीं हो, धर्मराज कहलाते।
पाप-पुण्य का लेखा, तुम ही तोलते जाते॥
जय प्रेतराज सरकार॥

चित्रगुप्त संग बैठे, न्याय तुम करते।
सबके कर्मों का फल, सब को तुम देते॥
जय प्रेतराज सरकार॥

भैंसे पर सवार हो, दंड हाथ धारे।
पापियों को दंड दो, भक्तों को उबारे॥
जय प्रेतराज सरकार॥

दक्षिण दिशा के स्वामी, यमपुरी बसाई।
वहां न्याय की गंगा, निर्मल बह आई॥
जय प्रेतराज सरकार॥

पितरों के रक्षक तुम, पितृ लोक बसाया।
श्राद्ध-तर्पण से तुमको, भक्तों ने मनाया॥
जय प्रेतराज सरकार॥

अकाल मृत्यु हरो, भय दूर भगाओ।
घर में सुख शांति दो, जीवन महकाओ॥
जय प्रेतराज सरकार॥

भटकी आत्माओं को, मुक्ति तुम दिलाओ।
पितृ दोष शांत करो, शांति घर में लाओ॥
जय प्रेतराज सरकार॥

जो करे आरती तेरी, श्रद्धा से गाता।
अकाल मृत्यु न होवे, मोक्ष वो पाता॥
जय प्रेतराज सरकार॥

जय प्रेतराज सरकार, जय प्रेतराज सरकार।
भक्तों के दुख हरते, जय प्रेतराज सरकार॥
जय प्रेतराज सरकार॥


॥ इति प्रेतराज सरकार आरती सम्पूर्णम् ॥


॥ प्रेतराज सरकार की विशेष स्तुति ॥


यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च।
वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च॥

औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने।
वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नमः॥


॥ इति प्रेतराज सरकार स्तुति सम्पूर्णम् ॥


आरती का अर्थ — हर पंक्ति का भाव जानें

पहली पंक्ति में प्रेतराज सरकार को भक्तों के दुख हरने वाला कहकर उनकी जय की गई है — यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि यमराज सिर्फ मृत्यु के देवता नहीं बल्कि न्याय और धर्म के भी रक्षक हैं। दूसरी पंक्ति में उन्हें धर्मराज कहा गया है जो पाप और पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं — हर प्राणी के जीवन का हिसाब उनके पास है। तीसरी पंक्ति में चित्रगुप्त का उल्लेख है जो यमराज के साथ मिलकर सबके कर्मों का न्याय करते हैं। चौथी पंक्ति में यमराज के उस भयंकर स्वरूप का वर्णन है जो पापियों को दंड देता है लेकिन भक्तों की रक्षा करता है। पांचवीं पंक्ति में दक्षिण दिशा का उल्लेख है जो यमराज की दिशा मानी जाती है और जहां यमपुरी स्थित है। छठी पंक्ति में पितरों के रक्षक के रूप में यमराज की स्तुति की गई है और बताया गया है कि श्राद्ध और तर्पण से वो प्रसन्न होते हैं। सातवीं पंक्ति में अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और घर में शांति के लिए प्रार्थना की गई है। आठवीं पंक्ति में भटकती आत्माओं की मुक्ति और पितृ दोष शांति के लिए प्रार्थना है। अंतिम पंक्ति में फल बताया गया है कि जो श्रद्धा से यह आरती गाता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


प्रेतराज सरकार आरती की सही विधि — इन 5 नियमों का पालन जरूरी है

पहला नियम — प्रेतराज सरकार की आरती शनिवार और अमावस्या के दिन करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है। शनिवार को यमराज और शनि देव दोनों का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन की गई आरती दोगुना फल देती है।

दूसरा नियम — इस आरती के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सरसों का तेल यमराज को प्रिय माना जाता है और इससे पितृ दोष शांत होता है। घी का दीपक भी जला सकते हैं लेकिन सरसों का तेल विशेष रूप से फलदायी है।

तीसरा नियम — आरती के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा है। इस दिशा में मुख करके की गई आरती सीधे प्रेतराज सरकार तक पहुंचती है और शीघ्र फल देती है।

चौथा नियम — आरती के बाद काले तिल और जल का तर्पण करें। काले तिल से तर्पण करना पितरों को शांति देता है और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है। अमावस्या के दिन यह तर्पण विशेष रूप से करें।

पांचवां नियम — आरती के बाद घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे घर में भटकती नकारात्मक आत्माओं का प्रवेश नहीं होता और घर में शांति बनी रहती है।


प्रेतराज सरकार आरती का सही समय — इस वक्त करने पर मिलता है दोगुना फल

प्रेतराज सरकार की आरती के लिए संध्याकाल यानी सूर्यास्त के बाद का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय यमराज की शक्ति सबसे अधिक सक्रिय होती है और उनकी आरती का प्रभाव सबसे तेज होता है। अमावस्या की रात को प्रेतराज सरकार की आरती करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। पितृ पक्ष के 16 दिनों में प्रतिदिन यह आरती करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। शनिवार की शाम को यह आरती करने से शनि और यम दोनों की कृपा एक साथ मिलती है।


प्रेतराज सरकार आरती के साथ करें यह 3 उपाय — शीघ्र मिलेगा फल

पहला उपाय — हर अमावस्या को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल से तर्पण करें। पीपल के पेड़ को यमराज का निवास माना जाता है और इस उपाय से पितृ दोष शांत होता है तथा पूर्वजों की आत्माओं को मोक्ष मिलता है।

दूसरा उपाय — अगर घर में बार-बार अशुभ घटनाएं हो रही हों या परिवार के सदस्यों को बुरे सपने आते हों तो शनिवार की रात को घर के चारों कोनों में सरसों का तेल और काले तिल रखें और अगली सुबह उसे घर से बाहर बहते पानी में प्रवाहित कर दें।

तीसरा उपाय — पितृ पक्ष में गया जी या किसी पवित्र नदी के तट पर जाकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान अवश्य करें। जिन परिवारों में श्राद्ध नियमित रूप से होता है उनमें पितृ दोष नहीं रहता और प्रेतराज सरकार की विशेष कृपा बनी रहती है।


प्रेतराज सरकार की पूजा किसके लिए सबसे जरूरी है

यह मत सोचिए कि प्रेतराज सरकार की पूजा सिर्फ उन लोगों के लिए है जिनके घर में कोई मर गया हो। यमराज न्याय के देवता हैं और उनकी पूजा हर उस व्यक्ति को करनी चाहिए जो अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रहना चाहता है, जिसके परिवार में पितृ दोष है, जिसके घर में बार-बार अशुभ घटनाएं होती हैं, जो अपने पूर्वजों को शांति देना चाहता है और जो मृत्यु के बाद मोक्ष की कामना रखता है। जो लोग नियमित रूप से शनिवार और अमावस्या को प्रेतराज सरकार की आरती करते हैं उन्हें न अकाल मृत्यु का भय रहता है और न पितृ दोष उन्हें परेशान करता है।


अगर अभी तक नहीं की प्रेतराज सरकार की आरती तो आज से ही शुरू करें

जिंदगी में बहुत बार हम उन देवताओं की पूजा भूल जाते हैं जो हमारी सबसे बड़ी रक्षा करते हैं। प्रेतराज सरकार यानी यमराज न सिर्फ मृत्यु के देवता हैं बल्कि वो न्याय, धर्म और पितरों के रक्षक भी हैं। जो लोग उनकी नियमित आरती और पूजा करते हैं उनके जीवन में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता, पितृ दोष शांत होता है और घर में भटकती नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव समाप्त होता है। तो इस शनिवार से ही प्रेतराज सरकार की आरती शुरू करें, दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पूर्वजों को याद करके तर्पण करें। क्योंकि जब प्रेतराज सरकार प्रसन्न होते हैं तो न अकाल मृत्यु का भय रहता है, न पितृ दोष सताता है और न घर में नकारात्मकता टिकती है — बस जीवन में हर तरफ से शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।


नोट: इस लेख में दी गई आरती और जानकारी धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है। आरती का पाठ सदैव शुद्ध मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ करें। किसी भी गंभीर पितृ दोष या अशुभ घटना के लिए किसी अनुभवी पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।


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