नमामि तुलसी माता | पूरी Lyrics, अर्थ और पूजा विधि
एक ऐसा पौधा जो सिर्फ पौधा नहीं — देवी है। एक ऐसी माता जो घर के आंगन में विराजकर पूरे परिवार की रक्षा करती है। सुबह उठते ही जिनके दर्शन से दिन शुभ हो जाता है — वो हैं तुलसी माता। हिंदू धर्म में तुलसी को साक्षात् विष्णुप्रिया माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Aarti Tulsi Mata Ki गाने से क्या होता है? क्यों रोज शाम तुलसी के सामने दीपक जलाया जाता है? और इस आरती का असली अर्थ क्या है? अगर आप तुलसी माता की भक्त हैं और उनकी कृपा पाना चाहते हैं — तो यह पोस्ट अंत तक पढ़िए। यहाँ सब कुछ है — पूरी lyrics, सरल अर्थ, पूजा विधि — एक ही जगह।
Aarti Tulsi Mata Ki क्यों गाते हैं?
तुलसी माता को “विष्णुप्रिया” कहा जाता है — यानी भगवान विष्णु की सबसे प्रिय। शास्त्रों में लिखा है —
“तुलसी श्रीसखी नित्यं सर्वदेवैः सुपूजिता। देवि त्वं पाहि मां नित्यं पापहारिणि नमोस्तुते॥”
अर्थ — तुलसी माता सदा लक्ष्मी की सखी हैं, सभी देवता उनकी पूजा करते हैं। हे देवी! आप मेरी सदा रक्षा करें।
Aarti Tulsi Mata Ki गाने से —
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है
- विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है
- रोग, दोष और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं
- विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- घर में कभी दरिद्रता नहीं आती
- पितृ दोष और ग्रह दोष शांत होते हैं
Table of Contents
Aarti Tulsi Mata Ki — पूरी Lyrics हिंदी में
॥ तुलसी माता की आरती ॥
नमामि तुलसी माता, नमामि तुलसी माता ।
जय जय तुलसी माता ॥
जग में तुलसी तू ही पूजित,
हरि को तू ही भाती माता ।
तेरे बिना न पूजा होती,
हरि चरणों की ज्ञाता माता ॥
नमामि तुलसी माता ॥
विष्णुप्रिया तू जगजननी,
भक्तन की सुखदाता माता ।
जो तेरी शरण में आए,
पापों से वो तर जाता माता ॥
नमामि तुलसी माता ॥
शालिग्राम संग शोभित तू,
वृंदावन की रहने वाली माता ।
सेवा करे जो प्रेम से तेरी,
उसको मोक्ष दिलाती माता ॥
नमामि तुलसी माता ॥
तेरे दर्शन से पाप कटे हैं,
रोग-दोष सब जाते माता ।
कार्तिक में जो दीप जलाए,
उसके घर हरि आते माता ॥
नमामि तुलसी माता ॥
तुलसी दल बिन हरि न माने,
भोग न लगता बाता माता ।
भगवान विष्णु की प्रिय सखी तू,
लक्ष्मी संग मुस्काती माता ॥
नमामि तुलसी माता ॥
तेरे नाम से रोग मिटे हैं,
घर में सुख की वर्षा माता ।
तुलसी तू वरदायिनी माता,
तू ही हमारी ज्ञाता माता ॥
जय जय तुलसी माता ।
नमामि तुलसी माता ॥
दूसरी प्रसिद्ध तुलसी आरती
॥ जय तुलसी माता ॥
जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता ।
शालिग्राम विराजे, दासी तू विख्याता ॥
जय तुलसी माता ॥
हरि का भोग न लगे बिन तेरे,
हरि को तू ही भाती ।
पूजन-अर्चन के बिन तेरे,
पूजा अधूरी जाती ॥
जय तुलसी माता ॥
वृंदावन में तू विराजे,
राधा-कृष्ण की प्यारी ।
जो भजे तुझको प्रेम से माता,
वो पाए मुक्ति सारी ॥
जय तुलसी माता ॥
कार्तिक मास में दीप जलाए,
जो भक्त रात-दिन तेरे ।
हरि उसकी झोली भर देते,
भाग जाते दुःख सारे ॥
जय तुलसी माता ॥
तुलसी विवाह जो रचाए,
विष्णु का वर पाए ।
घर में सुख-समृद्धि आए,
दरिद्रता दूर जाए ॥
जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता ।
शालिग्राम विराजे, दासी तू विख्याता ॥
Aarti Tulsi Mata Ki का सरल अर्थ
“नमामि तुलसी माता”
मैं तुलसी माता को नमस्कार करता हूं। आप जग में पूजित हैं, भगवान हरि को सबसे प्रिय हैं। आपके बिना हरि की कोई भी पूजा पूरी नहीं होती।
“विष्णुप्रिया तू जगजननी”
आप विष्णु जी की प्रिया हैं और पूरे जगत की माता हैं। जो भी आपकी शरण में आता है — आप उसे पापों से मुक्त कर देती हैं।
“शालिग्राम संग शोभित तू, वृंदावन की रहने वाली”
आप शालिग्राम (विष्णु) के साथ शोभायमान हैं। वृंदावन आपकी लीलाभूमि है। जो प्रेम से आपकी सेवा करता है — उसे मोक्ष मिलता है।
“कार्तिक में जो दीप जलाए, उसके घर हरि आते”
कार्तिक माह में तुलसी के सामने दीपक जलाने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसा करने वाले के घर स्वयं भगवान विष्णु पधारते हैं।
“तुलसी दल बिन हरि न माने”
भगवान विष्णु को अर्पित किसी भी भोग में तुलसी दल अनिवार्य है। बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं होता।
तुलसी माता की पूजा विधि
सही समय
- सुबह — सूर्योदय के बाद स्नान करके
- शाम — सूर्यास्त से पहले संध्या दीप
- कार्तिक माह — सबसे पवित्र समय, रोज पूजा अनिवार्य
पूजा सामग्री
- शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक
- लाल और पीले फूल
- अक्षत (साबुत चावल)
- कुमकुम और चंदन
- मिश्री या गुड़ का प्रसाद
- जल का लोटा
Step by Step विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
- तुलसी माता के गमले को साफ करें
- जल का लोटा चढ़ाएं — “ॐ तुलस्यै नमः” बोलते हुए
- कुमकुम और अक्षत से तिलक लगाएं
- दीपक जलाएं और Aarti Tulsi Mata Ki गाएं
- तुलसी की 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करें
- अंत में प्रसाद वितरण करें
ध्यान रखें ये बातें
- रविवार को तुलसी न तोड़ें — यह नियम सख्ती से पालन करें
- एकादशी को तुलसी न तोड़ें
- शाम के बाद तुलसी न छुएं
- हमेशा दाएं हाथ से तुलसी दल तोड़ें
किन अवसरों पर Aarti Tulsi Mata Ki विशेष रूप से गाएं
| अवसर | महत्व |
|---|---|
| तुलसी विवाह (कार्तिक शुक्ल एकादशी) | सबसे पवित्र — विशेष पूजा |
| कार्तिक माह | पूरे माह रोज दीपक और आरती |
| एकादशी व्रत | विष्णु कृपा के लिए |
| गृह प्रवेश | घर में मंगल और शांति |
| विवाह में रुकावट | जल्द विवाह के लिए |
| संतान प्राप्ति की इच्छा | विशेष पूजा |
| रोगमुक्ति | स्वास्थ्य लाभ के लिए |
तुलसी माता की कथा — संक्षेप में
पुराणों के अनुसार तुलसी माता का असली नाम वृंदा था। वो एक परम विष्णुभक्त राजकुमारी थीं। उनके पातिव्रत धर्म की शक्ति इतनी अपार थी कि देवता भी चिंतित हो गए।
भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया — “तुम इस धरती पर तुलसी के रूप में प्रकट होगी। मुझे चढ़ने वाला हर भोग, हर पूजा — तुम्हारे बिना अधूरी रहेगी।”
तभी से तुलसी माता को विष्णुप्रिया कहा जाता है। और इसीलिए भगवान विष्णु की हर पूजा में तुलसी दल अनिवार्य है।
निष्कर्ष
Aarti Tulsi Mata Ki गाना सिर्फ एक परंपरा नहीं — यह घर में देवी को बुलाने का तरीका है। जिस घर के आंगन में तुलसी माता विराजती हैं और जहाँ रोज उनकी आरती होती है — उस घर में कभी दुख, बीमारी और दरिद्रता नहीं आती।
आज से ही रोज शाम — तुलसी माता के सामने एक दीपक जलाइए और यह आरती गाइए। माँ की कृपा आप पर और आपके पूरे परिवार पर सदा बनी रहे।
जय तुलसी माता 🙏 जय विष्णुप्रिया
आरती तुलसी माता की – Tulsi Mata Aarti Lyrics, महत्व और लाभ
आरती तुलसी माता की का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हिंदू धर्म में तुलसी माता को बहुत पवित्र माना जाता है और हर दिन सुबह-शाम तुलसी के सामने दीपक जलाकर आरती करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा आती है।अगर आप Tulsi Mata Aarti Lyrics और इसका महत्व जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट में पूरी जानकारी दी गई है।
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