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श्री सूक्तम् — माँ लक्ष्मी को बुलाने का सबसे शक्तिशाली वैदिक मंत्र

क्या तुमने कभी सोचा है कि घर में पैसा क्यों नहीं टिकता? मेहनत भी करते हो, दिन-रात लगे भी रहते हो — फिर भी हाथ खाली रहता है। बरकत नहीं होती। सुकून नहीं मिलता।sri suktam path

इसका जवाब हमारे वेदों में हजारों साल पहले दे दिया गया था।

श्री सूक्तम् — ये वो दिव्य स्तुति है जो ऋग्वेद में लिखी गई है। माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे पुराना, सबसे शक्तिशाली और सबसे प्रामाणिक वैदिक मंत्र। जब ये मंत्र सच्चे मन से बोले जाते हैं — तो घर में सिर्फ धन नहीं आता, साथ आती है शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि।

आज इस पोस्ट में पूरा श्री सूक्तम् पाठ दे रहे हैं — अर्थ के साथ, महत्व के साथ। पढ़ो, समझो और रोज बोलो।

श्री सूक्तम् क्या है — जानो इसकी जड़

श्री सूक्तम् ऋग्वेद का एक परिशिष्ट सूक्त है। इसमें कुल 16 ऋचाएं हैं जो सीधे माँ लक्ष्मी की स्तुति करती हैं।

यहाँ “श्री” का मतलब सिर्फ पैसा नहीं है। श्री मतलब — वैभव, सौंदर्य, ज्ञान, यश, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति। माँ लक्ष्मी इन सबकी देवी हैं।

जब भी कोई यज्ञ होता है, कोई पूजा होती है, दीपावली आती है — श्री सूक्तम् का पाठ सबसे पहले होता है। क्योंकि ये माँ लक्ष्मी का आह्वान है — उन्हें घर में बुलाने का न्योता।sri suktam path

श्री सूक्तम् पाठ — सोलह पवित्र ऋचाएं

॥ पूर्वभाग — आह्वान ॥

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।।1।।

हे अग्निदेव! सोने जैसी कांति वाली, हरे रंग की आभा लिए, सोने-चांदी की माला पहने, चंद्रमा जैसी शीतल, स्वर्णमयी माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाओ।sri suktam path

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्।।2।।

हे जातवेद! उन माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाओ जो कभी न जाएं। जिनकी कृपा से मुझे सोना, गाय, घोड़े और श्रेष्ठ संतान प्राप्त हो।

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्।।3।।

जिनके आगे घोड़े चलते हैं, रथ बीच में है, हाथियों की गर्जना से जिनका आगमन होता है — उन देवी श्री को मैं बुलाता हूं। वे देवी मुझ पर प्रसन्न हों।sri suktam path

कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्।।4।।

जो कमल पर विराजमान हैं, कमल जैसी कांति वाली हैं, सोने की कांति से घिरी हैं, करुणा से भरी हैं, प्रकाशमान हैं — उन माँ श्री को यहाँ बुलाता हूं।

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्ये।।
अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे।।5।।

चंद्रमा जैसी आभा वाली, यश से दीप्त, देवताओं द्वारा पूजित, उदार माँ श्री की मैं शरण लेता हूं। हे माँ! मेरी दरिद्रता नष्ट हो — यही मांगता हूं।

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः।।6।।

हे सूर्य जैसी तेजस्विनी माँ! तुम्हारी तपस्या से उत्पन्न बिल्व वृक्ष है। उसके फल मेरे सब संकट, अंदर और बाहर की दरिद्रता को नष्ट करें।sri suktam path

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे।।7।।

देवताओं के मित्र कुबेर और कीर्ति — दोनों मेरे पास आएं। इस देश में प्रकट होकर मुझे यश और समृद्धि दें।sri suktam path

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्।।8।।

भूख-प्यास और मैल से भरी ज्येष्ठा (अलक्ष्मी) को मैं नष्ट करता हूं। हे माँ! मेरे घर से सब दुर्भाग्य, अभाव और असमृद्धि को बाहर करो।

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्।।9।।

जो सुगंध से प्रकट होती हैं, जिन्हें जीतना कठिन है, जो सदा पुष्ट और समृद्ध हैं, जो सब प्राणियों की ईश्वरी हैं — उन माँ श्री को यहाँ बुलाता हूं।sri suktam path

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः।।10।।

मन की इच्छा, संकल्प की सिद्धि, वाणी में सत्य, पशुओं का बल, अन्न की पूर्णता — ये सब मुझे मिलें। माँ श्री और यश मेरे पास निवास करें।

कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्।।11।।

हे कर्दम! तुम माँ श्री की संतान हो। मेरे कुल में निवास करो। कमल की माला धारण करने वाली माँ श्री को मेरे वंश में बसाओ।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस श्रियं।
मयि देवी जुषतामायुष्मन्तं करोतु मे।।12।।

जल स्नेहमय जीवन दे। हे चिक्लीत! माँ श्री को मेरे पास रहने दो। वे देवी मुझ पर प्रसन्न हों और मुझे दीर्घायु बनाएं।sri suktam path

चन्द्रां रश्मिं चन्द्रजूष्टामादित्यवर्णलोलुपाम्।
श्रियमिन्द्रे परिस्रव।।
अलक्ष्मीर्हरताद् अहम्।।13।।

चंद्रकांति वाली, सूर्य तेज वाली माँ श्री को इंद्र के घर से मेरे पास लाओ। और अलक्ष्मी मुझसे दूर जाए।sri suktam path

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।।14।।

करुणा से भरी, कमल धारिणी, पोषण देने वाली, सुनहरी आभा वाली, कमल माला पहने माँ लक्ष्मी को हे जातवेद! मेरे पास लाओ।sri suktam path

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।।15।।

जो करुणामयी हैं, स्वर्णमयी हैं, सोने की माला धारण करती हैं, सूर्य जैसी प्रकाशमान हैं — उन माँ लक्ष्मी को हे जातवेद! मेरे पास लाओ।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दासोऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्।।16।।

हे जातवेद! उन माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाओ जो कभी न जाएं। जिनकी कृपा से मुझे प्रचुर सोना, गायें, सेवक, घोड़े और संतान प्राप्त हो।sri suktam path

॥ फलश्रुति ॥

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्।।

जो व्यक्ति शुद्ध होकर प्रतिदिन घी की आहुति दे और इस पंद्रह ऋचाओं वाले श्री सूक्तम् का जप करे — उसे माँ लक्ष्मी की सदा कृपा प्राप्त होती है।

श्री सूक्तम् कब और कैसे पढ़ें

श्री सूक्तम् का पाठ सबसे ज्यादा फल देता है जब — शुक्रवार को माँ लक्ष्मी का दिन होता है, दीपावली पर, किसी भी शुभ कार्य से पहले, सुबह स्नान के बाद शांत मन से बैठकर।

पाठ करने से पहले — दीपक जलाओ, कमल या गुलाब का फूल रखो, थोड़ा घी या केसर का दीपक जलाओ। फिर पूरी श्रद्धा से पाठ करो। माँ जरूर सुनती हैं।

श्री सूक्तम् के फायदे — सिर्फ पैसा नहीं, बहुत कुछ

घर में सुख-समृद्धि आती है, मन में शांति मिलती है, परिवार में प्रेम बढ़ता है, कर्ज और दरिद्रता दूर होती है, और सबसे बड़ी बात — माँ लक्ष्मी का स्थायी निवास घर में होता है।

अंत में एक बात

श्री सूक्तम् कोई जादू नहीं है। ये एक समर्पण है — माँ लक्ष्मी के प्रति। जब तुम रोज सुबह उठकर ये मंत्र बोलते हो तो तुम्हारा मन साफ होता है। नकारात्मकता हटती है। और जब मन साफ होता है — तो रास्ते अपने आप खुलते हैं।

माँ लक्ष्मी उस घर में आती हैं जहाँ शुद्धता है, मेहनत है और भक्ति है।

जय माँ लक्ष्मी।


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