क्या आप सही एकादशी पर व्रत रख रहे हैं?
हिंदू धर्म में करोड़ों लोग एकादशी का व्रत रखते हैं — लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तिथि पर व्रत रखने से न सिर्फ फल नहीं मिलता बल्कि कई बार उल्टा असर भी होता है? हर महीने दो एकादशी आती हैं — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। और हर एकादशी का अलग नाम, अलग महत्व और अलग विधि होती है। लाखों श्रद्धालु सालों से व्रत रखते हैं और फिर भी उन्हें पूरा फल नहीं मिलता — सिर्फ इसलिए कि तिथि गलत थी, समय गलत था या विधि अधूरी थी। अगर आप 2025-2026 की हर एकादशी की सही तिथि, सही समय और सही व्रत विधि एक ही जगह जानना चाहते हैं तो यह लेख आखिर तक जरूर पढ़ें — क्योंकि यहां वो जानकारी भी है जो ज्यादातर कैलेंडर और वेबसाइट नहीं देतीं।
एकादशी क्या है — पहले असली परिचय जान लें
एकादशी का अर्थ है “ग्यारहवीं तिथि।” हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो पक्ष होते हैं — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष — और दोनों की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। इस तरह साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं और अधिक मास में 2 और जुड़ जाती हैं यानी 26। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और शास्त्रों में इसे सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पद्म पुराण में लिखा है कि एकादशी का व्रत रखने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि एकादशी का व्रत सही तिथि पर और सही विधि से रखा जाए — तभी भगवान विष्णु की पूर्ण कृपा मिलती है।
2026 की आने वाली एकादशी तिथियां — पूरी लिस्ट
यहां 2026 की प्रमुख एकादशी तिथियां दी जा रही हैं ताकि आप पहले से तैयारी कर सकें।
**मार्च 2026** — फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी एकादशी) 1 मार्च 2026, चैत्र कृष्ण एकादशी (पापमोचनी एकादशी) 16 मार्च 2026
**अप्रैल 2026** — चैत्र शुक्ल एकादशी (कामदा एकादशी) 30 मार्च / 1 अप्रैल 2026, वैशाख कृष्ण एकादशी (वरूथिनी एकादशी) 15 अप्रैल 2026
**मई 2026** — वैशाख शुक्ल एकादशी (मोहिनी एकादशी) 30 अप्रैल / 1 मई 2026, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अपरा एकादशी) 14 मई 2026
**जून 2026** — ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (निर्जला एकादशी) 29 मई / 30 मई 2026 — यह साल की सबसे कठिन और सबसे पुण्यशाली एकादशी है।
सटीक तिथि और पारण समय के लिए हमेशा अपने स्थानीय पंचांग या drikpanchang.com से कन्फर्म करें क्योंकि सूर्योदय के समय के अनुसार तिथि बदल सकती है।
एकादशी व्रत की सही विधि — स्टेप बाय स्टेप
एकादशी व्रत सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है — इसकी एक पूरी और वैज्ञानिक विधि है।
**दशमी की रात से तैयारी शुरू होती है।** एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी की रात को सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से बिल्कुल दूर रहें। रात को जल्दी सोएं और ब्रह्म मुहूर्त में उठने का प्रयास करें।
**एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें।** स्नान करें और स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं, तुलसी दल चढ़ाएं और पीले फूल अर्पित करें।
**व्रत का संकल्प लें।** मन ही मन या बोलकर संकल्प करें कि “मैं आज एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा के लिए रख रहा हूं।” बिना संकल्प के व्रत अधूरा माना जाता है।
**दिनभर विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या हरे राम हरे कृष्ण का जाप करें।** जितना अधिक नाम जाप होगा उतना अधिक पुण्य मिलेगा। एकादशी के दिन सोना नहीं चाहिए — यह नियम शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है।
**पारण — द्वादशी को व्रत तोड़ें।** एकादशी का व्रत द्वादशी यानी अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय में तोड़ा जाता है। इस समय को “पारण समय” कहते हैं। अगर आपने पारण गलत समय पर किया तो व्रत का फल आधा हो जाता है। पारण समय हमेशा पंचांग से देखें।
एकादशी व्रत के 7 नियम जो कोई नहीं बताता
पहला — एकादशी के दिन चावल बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, चाहे आप फलाहार कर रहे हों। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी को चावल खाना महापाप के समान है।
दूसरा — व्रत के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए और नाखून भी नहीं काटने चाहिए।
तीसरा — इस दिन किसी के बारे में बुरा न बोलें, न सुनें। मन, वचन और कर्म तीनों से पवित्र रहें।
चौथा — एकादशी को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए। तुलसी के पत्ते एक दिन पहले यानी दशमी को ही तोड़कर रख लें।
पांचवां — इस दिन किसी जरूरतमंद को भोजन कराना बेहद पुण्यशाली है। दान का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।
छठा — रात को जागरण करें। भगवान विष्णु की रात को पूजा करना अत्यंत शुभ है।
सातवां — अगर किसी कारण से पूर्ण उपवास संभव न हो तो फलाहार करें — लेकिन एकादशी को कभी भी बिना किसी नियम के सामान्य दिन की तरह न बिताएं।
निर्जला एकादशी — साल की सबसे शक्तिशाली एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं और यह साल की 24 एकादशियों में सबसे विशेष मानी जाती है। इस दिन बिना जल के व्रत रखने से सभी 24 एकादशियों का फल एक साथ मिलता है — यह बात महाभारत में स्वयं वेद व्यास जी ने भीमसेन को बताई थी। जो लोग पूरे साल एकादशी व्रत नहीं रख पाते उन्हें कम से कम निर्जला एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। 2026 में निर्जला एकादशी मई-जून के संधिकाल में पड़ेगी — सटीक तिथि के लिए पंचांग देखें।
एकादशी और विज्ञान — सिर्फ अंधविश्वास नहीं, इसके पीछे है ठोस वजह
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि महीने में दो बार उपवास करना शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी है। एकादशी के दिन उपवास रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर की detoxification होती है और मस्तिष्क अधिक सक्रिय होता है। Intermittent Fasting के जो फायदे आज डॉक्टर बता रहे हैं वो हमारे ऋषि-मुनि हजारों साल पहले एकादशी के रूप में बता चुके थे। चांद की स्थिति का मानव शरीर के जल स्तर पर सीधा प्रभाव पड़ता है और एकादशी की तिथि पर उपवास करना इस प्रभाव को संतुलित करता है।
आज से ही शुरू करें एकादशी व्रत — देरी मत करें
शास्त्रों में कहा गया है — “एकादश्यां तु यो भक्त्या, उपोष्य विष्णुमर्चयेत। सोऽश्वमेधमवाप्नोति, नरो नास्त्यत्र संशयः।” यानी जो व्यक्ति एकादशी का व्रत श्रद्धा से रखता है उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। करोड़ों लोगों ने एकादशी व्रत से अपनी जिंदगी बदली है — बीमारियां ठीक हुई हैं, आर्थिक संकट दूर हुए हैं, परिवार में सुख-शांति आई है। यह कोई कहानी नहीं — यह जीवंत अनुभव है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। अगली एकादशी आने से पहले इस लेख को सेव करें, तिथि नोट करें और सही विधि से व्रत रखें। क्योंकि जब भगवान विष्णु की कृपा होती है तो जीवन की हर कठिनाई स्वयं दूर होने लगती है।
> **नोट:** इस लेख में दी गई तिथियां सामान्य पंचांग के अनुसार हैं। आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार तिथि में 1 दिन का अंतर हो सकता है। सटीक तिथि और पारण समय के लिए अपना स्थानीय पंचांग देखें।


