पार्वती जी की आरती — सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और वो नियम जो हर भक्त को जानने चाहिए
एडमिन-3 द्वारा / 1 मार्च, 2026
पार्वती जी की आरती इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
हिंदू धर्म में माता पार्वती को शक्ति, प्रेम, सौभाग्य और वैवाहिक सुख की देवी माना जाता है। जो महिलाएं अखंड सौभाग्य चाहती हैं, जिन कन्याओं के विवाह में रुकावट है, जिन दंपतियों के बीच कलह है और जो लोग जीवन में माता की शक्ति और आशीर्वाद पाना चाहते हैं — उन सबके लिए पार्वती जी की आरती सबसे अचूक उपाय है। लेकिन बहुत से लोग आरती तो गाते हैं लेकिन उसका सही अर्थ नहीं जानते, सही विधि नहीं जानते और वो 5 जरूरी नियम नहीं जानते जो आरती को सच में फलदायी बनाते हैं। आज इस लेख में हम आपको पार्वती जी की सम्पूर्ण आरती, उसका अर्थ और सही विधि देंगे।
॥ पार्वती जी की आरती ॥
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता॥
अरिकुल पद्मा विनासिनि, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा, हर घट में विराजे॥
जय पार्वती माता॥
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साजे।
देव वधू जग माता, मंगल घट साजे॥
जय पार्वती माता॥
सती अनसूया धरके, सीता सी मन में।
हर विधि से तुम माता, भक्तों के मन में॥
जय पार्वती माता॥
शम्भू की अर्धांगिनी, तुम शक्ति अपार।
शिव के मन में बसती, जग की आधार॥
जय पार्वती माता॥
त्रिभुवन की स्वामिनी, तुम जगत की माता।
हर कष्ट हरो माता, सुख-शांति दिलाता॥
जय पार्वती माता॥
गौरी उमा कहलाती, अम्बे जगदम्बे।
भव बंधन काटो माता, भक्तों की अम्बे॥
जय पार्वती माता॥
सोलह श्रृंगार सजाकर, हरि मन भाती।
भक्तों के घर आकर, मंगल करती जाती॥
जय पार्वती माता॥
कार्तिक गणेश की माता, नंदी की स्वामिनी।
भोलेनाथ की संगिनी, जग की कल्याणिनी॥
जय पार्वती माता॥
जो कोई यह आरती, श्रद्धा से गाता।
सुख सौभाग्य घर आवे, मंगल हर्षाता॥
जय पार्वती माता॥
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता॥
॥ इति पार्वती माता आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ पार्वती जी की विशेष स्तुति ॥
नमस्ते शैलपुत्री च नमस्ते शंकरप्रिये।
नमस्ते जगतां माता नमस्ते पार्वती शुभे॥
गौरी उमा शाकम्भरी श्री दुर्गे स्वाहा स्वधा नमः।
काली कपालिनी चण्डी भद्रकाली नमोऽस्तु ते॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
॥ इति पार्वती माता स्तुति सम्पूर्णम् ॥
आरती का अर्थ — हर पंक्ति का भाव जानें
पहली पंक्ति में माता पार्वती को ब्रह्म सनातन देवी और शुभ फल की दाता कहकर उनकी जय की गई है — यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि माता पार्वती अनादि काल से इस सृष्टि की आदि शक्ति हैं। दूसरी पंक्ति में उन्हें अरिकुल यानी शत्रुओं का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली कहा गया है। तीसरी पंक्ति में माता के दिव्य स्वरूप का वर्णन है जिसमें वो सिंह पर सवार होकर कुण्डल और आभूषण धारण किए हुए हैं। चौथी पंक्ति में माता पार्वती की तुलना सती और अनसूया जैसी महान पतिव्रता नारियों से की गई है। पांचवीं पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है जिसमें माता को भगवान शिव की अर्धांगिनी और अपार शक्ति का स्रोत बताया गया है — शिव और शक्ति का यह मिलन ही सृष्टि का आधार है। छठी पंक्ति में तीनों लोकों की स्वामिनी माता से कष्ट हरने और सुख-शांति देने की प्रार्थना की गई है। सातवीं पंक्ति में माता के विभिन्न नामों — गौरी, उमा, अम्बे और जगदम्बा का उल्लेख है। आठवीं पंक्ति में माता के सोलह श्रृंगार का वर्णन है जो उनके सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक है। नवीं पंक्ति में माता को गणेश और कार्तिकेय की माता तथा भोलेनाथ की प्रिय संगिनी बताया गया है। अंतिम पंक्ति में फल बताया गया है कि जो इस आरती को श्रद्धा से गाता है उसके घर में सुख और सौभाग्य का वास होता है।
पार्वती जी की आरती की सही विधि — इन 5 नियमों का पालन जरूरी है
पहला नियम — पार्वती जी की आरती सोमवार और शुक्रवार को विशेष रूप से करें। सोमवार भगवान शिव का दिन है और चूंकि माता पार्वती शिव की अर्धांगिनी हैं इसलिए इस दिन की आरती दोगुना फल देती है। शुक्रवार सौभाग्य और प्रेम का दिन माना जाता है जो माता पार्वती की उपासना के लिए आदर्श है।
दूसरा नियम — आरती के समय माता को लाल फूल अर्पित करें। माता पार्वती को लाल रंग अत्यंत प्रिय है और लाल गुलाब या लाल कनेर के फूल चढ़ाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। सफेद फूल भी माता को प्रिय हैं इसलिए सफेद कमल या सफेद गुलाब भी चढ़ा सकते हैं।
तीसरा नियम — आरती करते समय सुहागिन महिलाएं अपना सोलह श्रृंगार करके बैठें। मान्यता है कि सोलह श्रृंगार के साथ माता की आरती करने वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है और उनके पति की आयु लंबी होती है।
चौथा नियम — आरती के बाद माता को सिंदूर और चूड़ी अर्पित करें। माता पार्वती एक आदर्श पत्नी का स्वरूप हैं और सिंदूर उनका सबसे प्रिय श्रृंगार है। जो महिलाएं माता को सिंदूर चढ़ाती हैं उनका सुहाग सदा बना रहता है।
पांचवां नियम — आरती के बाद माता को पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं। प्रसाद को परिवार में बांटें और घर के बाहर भी किसी जरूरतमंद को दें — यह माता का आशीर्वाद है।
पार्वती जी की आरती का सही समय — इस वक्त करने पर मिलता है दोगुना फल
पार्वती जी की आरती के लिए प्रातःकाल यानी सूर्योदय का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय माता की शक्ति सबसे अधिक सक्रिय रहती है और उनकी आरती का प्रभाव पूरे दिन बना रहता है। सोमवार की सुबह शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बना रहता है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता पार्वती की आरती प्रतिदिन करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। हरतालिका तीज और गौरी तृतीया के दिन माता की आरती करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है क्योंकि ये दिन विशेष रूप से माता पार्वती को समर्पित हैं।
पार्वती जी की आरती के साथ करें यह 3 उपाय — माता तुरंत प्रसन्न होंगी
पहला उपाय — हर सोमवार को शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं और साथ में माता पार्वती को लाल फूल अर्पित करें। शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाती है और जिन कन्याओं के विवाह में रुकावट है उनके लिए मनचाहा जीवनसाथी मिलने का मार्ग खुलता है।
दूसरा उपाय — हरतालिका तीज का व्रत विधिपूर्वक रखें। इस दिन माता पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाकर रात भर पूजा करें और अगले दिन व्रत खोलें। मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली महिलाओं को माता पार्वती जैसा अखंड सौभाग्य मिलता है।
तीसरा उपाय — घर में माता पार्वती और भगवान शिव की युगल मूर्ति या तस्वीर पूजा स्थान में स्थापित करें और हर दिन उन्हें एक साथ पूजें। यह उपाय घर में दांपत्य सुख और प्रेम बनाए रखने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
पार्वती जी की आरती किसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है
माता पार्वती की आरती हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो अपने जीवन में प्रेम, सौभाग्य और शक्ति चाहता है। जो विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु चाहती हैं उनके लिए यह आरती सबसे अचूक उपाय है। जिन कन्याओं के विवाह में बार-बार रुकावट आ रही है उनके लिए सोमवार को माता की आरती करना अत्यंत फलदायी है। जो दंपती आपसी कलह से परेशान हैं और वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य चाहते हैं उनके लिए माता पार्वती की आरती सबसे बड़ा उपाय है। जो लोग जीवन में शक्ति और साहस चाहते हैं उनके लिए नवरात्रि में माता की आरती विशेष रूप से फलदायी है।
अगर अभी तक नहीं की पार्वती जी की आरती तो आज से ही शुरू करें
जिंदगी में बहुत बार हम उन देवियों की उपासना भूल जाते हैं जो हमारे जीवन में सबसे जरूरी हैं। माता पार्वती सिर्फ शिव की पत्नी नहीं — वो इस सृष्टि की आदि शक्ति हैं, हर नारी का स्वरूप हैं और हर घर की शक्ति हैं। जो लोग नियमित रूप से माता पार्वती की आरती करते हैं उनके जीवन में एक अदृश्य बदलाव आता है — वैवाहिक जीवन में मिठास आती है, घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता की शक्ति हर संकट में साथ देती है। तो इस सोमवार से ही माता पार्वती की आरती शुरू करें, लाल फूल और सिंदूर चढ़ाएं और पूरी श्रद्धा के साथ माता का आशीर्वाद लें। क्योंकि जब माता पार्वती की कृपा होती है तो न वैवाहिक जीवन में कलह रहती है, न सौभाग्य में कमी रहती है और न घर में शक्ति की कमी रहती है — बस जीवन में हर तरफ से माता का आशीर्वाद और प्रेम का वास होता है।
नोट: इस लेख में दी गई आरती और जानकारी धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है। आरती का पाठ सदैव शुद्ध मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ करें।
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