शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् — पाँच अक्षरों में समाई है पूरी सृष्टि का रहस्य
एक सवाल —
दुनिया में लाखों मंत्र हैं। करोड़ों श्लोक हैं। लेकिन अगर एक ही मंत्र चुनना हो — सबसे शक्तिशाली, सबसे पुराना, सबसे सरल — तो कौन सा होगा?
ॐ नमः शिवाय।
पाँच अक्षर। न — म — शि — वा — य।
बस यही पाँच अक्षर। और इन पाँच अक्षरों में समाई है पूरी सृष्टि। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — पाँचों तत्व इन पाँच अक्षरों में हैं।
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् — आदि शंकराचार्य द्वारा रचित। पाँच श्लोक। हर श्लोक एक अक्षर को समर्पित। हर श्लोक में भगवान शिव का एक दिव्य रूप।
जब शंकराचार्य जैसे महान दार्शनिक ने पाँच अक्षरों की स्तुति में पाँच श्लोक लिखे — तो वो साधारण श्लोक नहीं थे। वो एक ऐसी यात्रा है जो पाँच तत्वों से गुजरते हुए शिव तक पहुँचती है। Time
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् क्या है
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य की रचना है। इसमें पाँच श्लोक हैं — हर श्लोक ॐ नमः शिवाय के एक-एक अक्षर को समर्पित।
न — नागेंद्रहाराय।
म — मंदाकिनी सलिल।
शि — शिताकांत शेखर।
वा — वसिष्ठ।
य — यक्षस्वरूपाय।
और हर श्लोक के अंत में — “नमः शिवाय”
इस स्तोत्र को पढ़ने से पंचाक्षर मंत्र का फल मिलता है। और अंत में कहा गया है — जो इसे पढ़ता है — वो शिव का परम भक्त बनता है।शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
॥ शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् ॥
॥ आदि शंकराचार्य विरचितम् ॥
॥ पूर्वभाग — आह्वान ॥
ॐ नमः शिवाय।
श्री गणेशाय नमः।
॥ प्रथम श्लोक — न ॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय।
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय।
तस्मै नकाराय नमः शिवाय।।१।।
जो नागराज को हार की तरह पहनते हैं, तीन नेत्रों वाले, भस्म अंगराग वाले महेश्वर। नित्य, शुद्ध, दिगंबर — उन नकार (न) स्वरूप शिव को नमस्कार।
नागेंद्रहाराय — सर्पराज को माला की तरह गले में पहनने वाले। सर्प काल का प्रतीक है — शिव काल के भी काल हैं। त्रिलोचनाय — तीन आँखें — भूत, भविष्य, वर्तमान। तीसरी आँख खुले तो कुछ नहीं बचता। दिगंबराय — दिशाएं ही वस्त्र हैं — यानी अनंत, असीमित।शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
न = पृथ्वी तत्व। जो पृथ्वी की तरह सबको धारण करता है।
॥ द्वितीय श्लोक — म ॥
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय।
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय।
तस्मै मकाराय नमः शिवाय।।२।।
मंदाकिनी के जल और चंदन से अर्चित, नंदीश्वर और प्रमथनाथ के महेश्वर। मंदार और अनेक पुष्पों से भलीभाँति पूजित — उन मकार (म) स्वरूप शिव को नमस्कार।
मंदाकिनीसलिल — मंदाकिनी यानी आकाश-गंगा। शिव के जटाओं में गंगा है। नंदीश्वर — नंदी शिव के परम भक्त और द्वारपाल। मंदारपुष्प — देवताओं के कल्पवृक्ष का फूल।शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
म = जल तत्व। जो जल की तरह सबको जीवन देता है।
॥ तृतीय श्लोक — शि ॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द।
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय।
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय।।३।।
गौरी के कमल-मुख के सूर्य को, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले को। श्री नीलकंठ, वृषध्वज को — उन शिकार (शि) स्वरूप शिव को नमस्कार।शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय — जो गौरी के कमल-मुख को खिलाने वाले सूर्य हैं। दक्षाध्वरनाशकाय — दक्ष के अहंकार से भरे यज्ञ को नष्ट करने वाले। नीलकंठ — विष पीकर भी नीला कंठ — सहनशीलता की पराकाष्ठा।
शि = अग्नि तत्व। जो अग्नि की तरह सब कुछ शुद्ध करता है।
॥ चतुर्थ श्लोक — वा ॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य।
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय।
तस्मै वकाराय नमः शिवाय।।४।।
वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम जैसे महर्षियों और मुनींद्र-देवताओं द्वारा पूजित शेखर को। चंद्र, सूर्य और अग्नि जिनके नेत्र हैं — उन वकार (व) स्वरूप शिव को नमस्कार।
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य — वसिष्ठ (ब्राह्मणों के गुरु), अगस्त्य (कुम्भोद्भव — कलश से उत्पन्न), गौतम — ये तीनों महान ऋषि शिव की पूजा करते हैं। चंद्रार्कवैश्वानरलोचन — चंद्र, सूर्य और अग्नि — तीनों शिव के नेत्र हैं।
वा = वायु तत्व। जो वायु की तरह सर्वव्यापी है।
॥ पंचम श्लोक — य ॥
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय।
पिनाकहस्ताय सनातनाय।।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय।
तस्मै यकाराय नमः शिवाय।।५।।
यज्ञ स्वरूप, जटाधारी, पिनाक (धनुष) हाथ में लिए, सनातन। दिव्य, देव, दिगंबर — उन यकार (य) स्वरूप शिव को नमस्कार।
यज्ञस्वरूपाय — शिव स्वयं यज्ञ हैं। जटाधराय — जटाओं में गंगा धारण करने वाले। पिनाकहस्ताय — पिनाक धनुष हाथ में लिए। सनातनाय — सनातन — अनादि अनंत।
य = आकाश तत्व। जो आकाश की तरह सर्वत्र व्याप्त है।
॥ फलश्रुति ॥
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।
जो इस पुण्य पंचाक्षर स्तोत्र को शिव के सामने पढ़े — वो शिवलोक पाता है और शिव के साथ आनंद लेता है।
ॐ नमः शिवाय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।।
पाँच अक्षरों का गहरा रहस्य
ॐ नमः शिवाय के पाँच अक्षर — न, म, शि, वा, य — ये केवल अक्षर नहीं हैं।
न — पृथ्वी तत्व। स्थिरता, धैर्य, सहनशीलता।
म — जल तत्व। प्रवाह, करुणा, जीवन।
शि — अग्नि तत्व। तेज, शुद्धि, ऊर्जा।
वा — वायु तत्व। गति, स्वतंत्रता, व्यापकता।
य — आकाश तत्व। अनंतता, शून्यता, चेतना।
जब ये पाँचों तत्व एक साथ उच्चारण होते हैं — तो पूरी सृष्टि शिव के नाम में समा जाती है।
और ॐ — वो परम बीज जो इन सब से परे है।
इसीलिए ॐ नमः शिवाय को महामंत्र कहते हैं।
शिव पंचाक्षर स्तोत्र कब और कैसे पढ़ें
सोमवार और महाशिवरात्रि को विशेष रूप से पढ़ो। प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल अर्पण करके पढ़ो। बेल-पत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करो। घी का दीपक जलाओ।
पाठ के बाद ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करो।
अंत में
शंकराचार्य ने पाँच श्लोकों में शिव के बारे में जो कहा — वो हजारों ग्रंथों में भी नहीं मिलता।
लेकिन सबसे बड़ी बात यह है —
पाँच अक्षरों से बड़ा कोई मंत्र नहीं।
“ॐ नमः शिवाय।”
बस यही काफी है। सुबह उठकर यही बोलो। सोने से पहले यही बोलो। जब खुश हो तब भी। जब दुखी हो तब भी।
शिव सुनते हैं। शिव हमेशा सुनते हैं।
ॐ नमः शिवाय।।
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