बिल्वाष्टकम् — बेलपत्र की वो आठ स्तुतियाँ जो भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रसन्न करती हैं
एक बात जो हर शिव भक्त जानता है —
शिव को सबसे प्रिय है बेलपत्र।
न सोना, न चाँदी, न हीरे-मोती। बस एक बेलपत्र। तीन पत्तियों वाला। साफ। ताजा।
और भगवान शिव प्रसन्न।
लेकिन क्या तुम जानते हो — बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है शिव को?
इसका जवाब है बिल्वाष्टकम् में।
यह स्तोत्र बेलपत्र की महिमा का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि बेलपत्र कोई साधारण पत्ता नहीं — यह स्वयं माँ लक्ष्मी का निवास है, यह तीनों देवों का प्रतीक है, यह अमृत से भी बढ़कर है।
बिल्वाष्टकम् — आठ श्लोक। हर श्लोक में बेलपत्र की एक नई महिमा। और हर श्लोक के अंत में —
“शिवार्पणमस्तु।”
यह शिव को समर्पण है।
बिल्वाष्टकम् क्या है — जानो इसकी कहानी
बिल्वाष्टकम् एक प्राचीन स्तोत्र है जिसमें बेल वृक्ष और बेलपत्र की महिमा का वर्णन है। यह स्तोत्र शिव पुराण से प्रेरित है।
बेल — बिल्व — शिव का सबसे प्रिय वृक्ष। शिव पुराण कहता है — जो बेलपत्र से शिव की पूजा करता है — उसे एक हजार गाय दान का फल मिलता है।
बिल्वाष्टकम् में यही बताया गया है — बेलपत्र क्यों इतना महत्वपूर्ण है? बेलपत्र में क्या रहस्य है? और बेलपत्र से शिव की पूजा करने का क्या फल है?
॥ बिल्वाष्टकम् ॥
॥ पूर्वभाग ॥
ॐ नमः शिवाय।
॥ आठ श्लोक ॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।१।।
तीन दल वाला, तीन गुणों का आकार, तीन नेत्रों का प्रतीक, तीन आयुधों का प्रतीक। तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाला — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण श्लोक है। बेलपत्र में तीन का रहस्य है।
तीन दल — तीन पत्तियाँ। ये तीन पत्तियाँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की प्रतीक हैं। एक पत्ते में तीनों देव।
त्रिगुणाकार — सत्व, रज, तम — तीनों गुणों का प्रतीक।
त्रिनेत्र — शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक — भूत, वर्तमान, भविष्य।
त्रिधायुध — शिव के तीन आयुध — त्रिशूल, डमरू, पिनाक।
त्रिजन्मपापसंहार — तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। एक बेलपत्र से। बस एक।
त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः।
शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्।।२।।
तीन शाखाओं वाले, बिना छिद्र के, कोमल और शुभ बेलपत्रों से। शिव की पूजा करूंगा — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
बेलपत्र अर्पण करने के नियम — अच्छिद्र यानी बिना छेद के। कोमल यानी ताजा। शुभ यानी पवित्र। जो बेलपत्र कीड़े ने काटा हो, जो मुरझाया हो — वो नहीं। शिव के लिए सर्वोत्तम।
कोटिकन्यामहादानं तीर्थकोटिस्नानम्।
कन्याकोटिसुवर्णदानं एकबिल्वं शिवार्पणम्।।३।।
करोड़ कन्यादान का पुण्य, करोड़ तीर्थों में स्नान का पुण्य। करोड़ कन्याओं को सोना दान का पुण्य — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
यह श्लोक बेलपत्र की अपार महिमा बताता है। करोड़ कन्यादान का पुण्य — जो सबसे बड़ा दान माना जाता है। करोड़ तीर्थों में स्नान — जो सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। करोड़ कन्याओं को सोना — जो सबसे बड़ा उपहार माना जाता है।
यह सब पुण्य केवल एक बेलपत्र से मिलता है।
दन्तिकोटिसहस्राणि वाजपेयशतानि च।
कोटिकन्यामहादानं एकबिल्वं शिवार्पणम्।।४।।
हजारों हाथी दान, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ। करोड़ कन्यादान — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
दंतिकोटि — करोड़ हाथियों का दान — राजाओं का सबसे बड़ा दान। वाजपेय — वेदों का सर्वश्रेष्ठ यज्ञ। ये सब भी एक बेलपत्र के बराबर नहीं।
लक्ष्म्याः स्तनोत्सृत्य बिल्वनिर्मितायाः।
बिल्वस्य पत्रं शिवपूजनार्थं एकबिल्वं शिवार्पणम्।।५।।
लक्ष्मी के वक्षस्थल से उत्पन्न बेल वृक्ष। उस बेल का पत्ता शिव पूजन के लिए — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
यह श्लोक बेल वृक्ष की उत्पत्ति का रहस्य बताता है।
माँ लक्ष्मी के वक्षस्थल से बेल वृक्ष का जन्म हुआ। इसीलिए बेल वृक्ष में लक्ष्मी का वास है। जो बेल वृक्ष की पूजा करता है — उसे माँ लक्ष्मी और भगवान शिव — दोनों की कृपा मिलती है।
दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।
अघोरपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।६।।
बेल वृक्ष का दर्शन, स्पर्शन पापनाशक। अघोर पापों का संहार करने वाला — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
दर्शनं बिल्ववृक्षस्य — बेल वृक्ष का दर्शन मात्र पाप नाशक। स्पर्शनं पापनाशनम् — छूने मात्र से पाप नष्ट। अघोरपापसंहार — अघोर यानी भयंकर पाप भी नष्ट।
यह बेल वृक्ष की अद्भुत शक्ति है। मंदिर न जाओ, पूजा न करो — बस बेल वृक्ष के पास जाओ, देखो, छुओ — पाप नष्ट।
काशीक्षेत्रं निवासं च कालभैरवदर्शनम्।
प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एकबिल्वं शिवार्पणम्।।७।।
काशी क्षेत्र में निवास और कालभैरव के दर्शन। प्रयाग में माधव के दर्शन — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
काशीक्षेत्रनिवास — काशी में रहने का पुण्य — जो मोक्ष का द्वार है। कालभैरवदर्शन — काशी के कालभैरव के दर्शन — जो अत्यंत दुर्लभ। प्रयागमाधव — प्रयाग के माधव यानी विष्णु के दर्शन। यह सब पुण्य एक बेलपत्र में।
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रतः शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम्।।८।।
जड़ में ब्रह्म रूप, मध्य में विष्णु रूप। अग्र भाग में शिव रूप — एक बेलपत्र शिव को अर्पण।
यह आठवाँ और सबसे गहरा श्लोक है।
मूलतो ब्रह्मरूपाय — बेल की जड़ में ब्रह्मा हैं। मध्यतो विष्णुरूपिणे — बेल के मध्य भाग में विष्णु हैं। अग्रतः शिवरूपाय — बेल के अग्र भाग में शिव हैं।
यानी एक बेलपत्र में ब्रह्मा, विष्णु, महेश — तीनों देव विराजमान हैं।
जब एक बेलपत्र शिव को अर्पण करते हो — तो तीनों देवों की पूजा हो जाती है।
॥ फलश्रुति ॥
बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकमाप्नुयात्।।
जो पुण्य बिल्वाष्टकम् को शिव के सामने पढ़े — वो सभी पापों से मुक्त होकर शिवलोक प्राप्त करता है।
बेलपत्र का रहस्य — जो स्कूल में नहीं पढ़ाते
बिल्वाष्टकम् पढ़ने के बाद बेलपत्र के बारे में जो समझ आती है — वो बहुत गहरी है।
पहला रहस्य — बेलपत्र की तीन पत्तियाँ ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं। जब शिव को बेलपत्र चढ़ाते हो — तो तीनों देवों की पूजा एक साथ होती है।
दूसरा रहस्य — बेल वृक्ष में माँ लक्ष्मी का वास है। जो शिव को बेलपत्र चढ़ाता है — उसके घर में लक्ष्मी भी आती हैं।
तीसरा रहस्य — बेल वृक्ष का दर्शन मात्र पापनाशक है। यानी सोमवार को बेल वृक्ष के पास जाओ, प्रणाम करो — पाप नष्ट।
चौथा रहस्य — तीन जन्मों के पाप एक बेलपत्र से नष्ट होते हैं। यानी बेलपत्र अर्पण सबसे सस्ता और सबसे शक्तिशाली उपाय है।
बेलपत्र अर्पण के नियम
बेलपत्र अर्पण करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखो —
बेलपत्र ताजा और साफ होना चाहिए — मुरझाया या कीड़े का खाया नहीं। तीनों पत्तियाँ जुड़ी होनी चाहिए — एक या दो नहीं। बेलपत्र की उल्टी तरफ यानी चिकनी तरफ शिवलिंग पर रखें। एकादशी को बेलपत्र न तोड़ें। बेलपत्र पर ॐ नमः शिवाय लिखकर चढ़ाना विशेष फलदायी है।
बिल्वाष्टकम् कब और कैसे पढ़ें
सोमवार और प्रदोष को विशेष रूप से पढ़ो। महाशिवरात्रि पर रात भर पढ़ने का विशेष महत्व। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण करते हुए पढ़ो। घी का दीपक जलाओ।
पाठ के बाद ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करो।
अंत में
बिल्वाष्टकम् का सबसे बड़ा संदेश एक पंक्ति में है —
“त्रिजन्मपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।”
तीन जन्मों के पाप। एक बेलपत्र।
शिव को कुछ बड़ा नहीं चाहिए। एक बेलपत्र। सच्चे मन से अर्पण। बस।
यही शिव की सबसे बड़ी खासियत है। वो आशुतोष हैं — जल्दी प्रसन्न होने वाले। वो भोलेनाथ हैं — जो भोले की पूजा करते हैं उन पर भोले प्रसन्न होते हैं।
अगली बार जब शिव मंदिर जाओ — एक बेलपत्र ले जाओ। शिवलिंग पर रखो। बिल्वाष्टकम् पढ़ो।
तीन जन्मों के पाप नष्ट।
ॐ नमः शिव