Brihaspativar Aarti

Brihaspativar Aarti — गुरुवार की आरती | पूरी Lyrics, अर्थ और व्रत विधि

हर हफ्ते एक दिन ऐसा आता है जो बाकी सब दिनों से अलग होता है। जिस दिन पीला पहनने की परंपरा है, चने की दाल खाने की मान्यता है और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है — वो दिन है गुरुवार यानी बृहस्पतिवार। और जब इस दिन Brihaspativar Aarti की धुन घर में गूंजती है — तो लगता है जैसे घर में साक्षात् देव गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु का आशीर्वाद उतर आया हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस आरती की हर पंक्ति में क्या गहरा भाव छुपा है? गुरुवार का व्रत सही तरीके से कैसे करें? और किन लोगों को यह व्रत जरूर करना चाहिए? अगर नहीं जानते — तो यह पोस्ट अंत तक पढ़िए। सब कुछ मिलेगा यहाँ — पूरी lyrics, अर्थ, व्रत विधि — एक ही जगह।

Brihaspativar Aarti क्यों करते हैं?

बृहस्पतिवार को गुरुवार भी कहते हैं। यह दिन देव गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु दोनों को समर्पित है।

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को नवग्रहों का गुरु कहा जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो — उसे धन, विद्या, विवाह और संतान में परेशानी आती है।

Brihaspativar Aarti और व्रत करने से —

  • बृहस्पति ग्रह की कमजोरी दूर होती है
  • धन और समृद्धि में वृद्धि होती है
  • विवाह की रुकावटें टूटती हैं
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • शिक्षा और बुद्धि में वृद्धि होती है
  • व्यापार और नौकरी में तरक्की मिलती है
  • घर में सुख-शांति और बरकत आती है
  • गुरु का आशीर्वाद जीवन में बना रहता है

Table of Contents

Brihaspativar Aarti
Brihaspativar Aarti

Brihaspativar Aarti — पूरी Lyrics हिंदी में

॥ बृहस्पतिवार की आरती ॥

जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होते, संकट सब टल जाते ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

सब अपराध क्षमा करो, जो सेवक शरण पड़ें ।
जय जय जय बृहस्पति, दया दृष्टि करो ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

ऋद्धि सिद्धि मंगल करो, पूर्ण करो आशा ।
तुम बिन कौन उबारे, तुम बिन कौन उद्धारे ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

विनय करें हम सब मिल, भक्त तुम्हारे आए ।
गुरुवार व्रत धारे जो, भक्त सुख पाए ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

अनेक रूप धरे प्रभु, सकल जग दर्शाए ।
विष्णु रूप में सब तुम, जग को पाल रहे ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

जो गुरुवार आरती, प्रेम सहित गावें ।
जन्म-जन्म के पातक, सब ही मिट जाते ॥

जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा ॥

दूसरी प्रसिद्ध बृहस्पतिवार आरती

॥ जय विष्णु भगवान ॥

जय विष्णु भगवान, स्वामी जय विष्णु भगवान ।
गुरुवार के स्वामी, भक्त तेरे महान ॥
जय विष्णु भगवान ॥

पीत वस्त्र धर शोभित, कमल नयन सुंदर ।
शंख चक्र गदा पद्म, शोभित चतुर्भुज ॥
जय विष्णु भगवान ॥

केले का भोग लगाए, पीला पुष्प चढ़ाए ।
गुरुवार व्रत जो करे, इच्छित फल पाए ॥
जय विष्णु भगवान ॥

बृहस्पति देव की महिमा, वेद-पुराण गावें ।
सुख-समृद्धि और वैभव, भक्तन को दिलावें ॥
जय विष्णु भगवान ॥

धन-धान्य और संपदा, जो तुमसे मांगे ।
पूरी करते सब इच्छाएं, भक्त तुम्हारे आगे ॥

जय विष्णु भगवान, स्वामी जय विष्णु भगवान ।
गुरुवार के स्वामी, भक्त तेरे महान ॥
जय विष्णु भगवान ॥

Brihaspativar Aarti का सरल अर्थ

“जय बृहस्पति देवा, छिन छिन भोग लगाऊं”

हे बृहस्पति देव! आपकी जय हो। मैं हर पल आपको केले और मेवे का भोग अर्पित करता हूं।

“तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी”

आप पूर्ण परमात्मा और सबके हृदय में बसने वाले अंतर्यामी हैं। आप ही जगत के पिता और सबके स्वामी हैं।

“चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता”

आपके चरणों का अमृत जल अत्यंत पवित्र है। यह सभी पापों को हरने वाला है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला है।

“तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े”

जो भक्त अपना तन, मन और धन आपको समर्पित करके आपकी शरण में आता है — आप उस पर प्रकट होते हैं और उसके सभी संकट दूर होते हैं।

“ऋद्धि सिद्धि मंगल करो, पूर्ण करो आशा”

हे देव! मुझे ऋद्धि-सिद्धि और मंगल का आशीर्वाद दें। मेरी सभी आशाएं और इच्छाएं पूर्ण करें। आपके बिना कोई उबारने वाला नहीं।

“जो गुरुवार आरती, प्रेम सहित गावें”

सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति — जो भी प्रेम और श्रद्धा से गुरुवार की आरती गाता है उसके जन्म-जन्म के पाप मिट जाते हैं।

“पीत वस्त्र धर शोभित, कमल नयन सुंदर”

भगवान विष्णु पीले वस्त्र धारण किए हैं, उनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं। चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और पद्म शोभायमान हैं।

Brihaspativar Aarti की सही पूजा विधि

सही समय

  • गुरुवार की सुबह — सूर्योदय के बाद
  • सूर्यास्त से पहले — शाम की आरती
  • पूर्णिमा वाला गुरुवार — सबसे विशेष

पूजा सामग्री

  • पीले फूल — गेंदा और पीला गुलाब
  • केला — बृहस्पति देव का सबसे प्रिय भोग
  • चने की दाल और गुड़
  • पीली मिठाई — बेसन के लड्डू
  • शुद्ध घी का दीपक
  • पीला चंदन और हल्दी
  • तुलसी दल — अनिवार्य

Step by Step विधि

  1. गुरुवार को सुबह स्नान करके पीले वस्त्र पहनें
  2. भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की तस्वीर स्थापित करें
  3. पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें
  4. केले का भोग लगाएं — यह अनिवार्य है
  5. घी का दीपक जलाएं
  6. “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का 108 बार जप करें
  7. पूरी Brihaspativar Aarti भावपूर्वक गाएं
  8. बृहस्पतिवार की कथा पढ़ें या सुनें
  9. प्रसाद में केला और चने की दाल बांटें

व्रत में क्या खाएं — क्या न खाएं

खाएं — केला, पीली दाल, गुड़, दूध, फल

न खाएं — नमक, तेल, मांस-मच्छी, बैंगन

किन लोगों को Brihaspativar Aarti जरूर करनी चाहिए

समस्याकैसे मिलेगा फायदा
विवाह में देरी हो रही होलगातार 21 गुरुवार व्रत करें
संतान नहीं हो रहीगुरुवार को केले का भोग लगाएं
धन की तंगी होपीले वस्त्र में चने की दाल दान करें
पढ़ाई में मन न लगेबृहस्पति मंत्र जप करें
नौकरी नहीं मिल रही11 गुरुवार लगातार व्रत करें
गुरु ग्रह कमजोर होपुखराज रत्न धारण + आरती
व्यापार में नुकसान होगुरुवार को मंदिर में केला दान करें

बृहस्पतिवार व्रत कथा — संक्षेप में

एक बार एक राजा था जो अत्यंत दानी और धर्मनिष्ठ था। लेकिन उसकी रानी बहुत कंजूस थी। एक बार बृहस्पति देव साधु के वेश में राजा के दरबार में आए और दान मांगा।

रानी ने दान देने से मना कर दिया। इससे बृहस्पति देव रुष्ट हो गए और राजा का सारा धन नष्ट हो गया। राजा दरिद्र हो गया। बाद में जब रानी ने गुरुवार का व्रत किया, Brihaspativar Aarti गाई और बृहस्पति देव से क्षमा मांगी — तो सब कुछ वापस मिल गया।

इसीलिए कहते हैं — बृहस्पति देव की कृपा से जो गया वो वापस आता है, और जो है वो बना रहता है।

बृहस्पति ग्रह और इसके उपाय

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को “देव गुरु” कहा गया है। अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर है तो —

लक्षण होंगे — विवाह में देरी, संतान में परेशानी, धन की कमी, शिक्षा में रुकावट, गुरु का अपमान होना।

उपाय

  • हर गुरुवार Brihaspativar Aarti करें
  • पीले वस्त्र पहनें
  • केला दान करें
  • “ॐ गुं गुरुवे नमः” का जप करें
  • पुखराज रत्न धारण करें (ज्योतिषी की सलाह से)

निष्कर्ष

Brihaspativar Aarti उन सभी लोगों के लिए है जो जीवन में धन, सुख, विवाह, संतान और तरक्की चाहते हैं। बृहस्पति देव को प्रसन्न करना मुश्किल नहीं — बस हर गुरुवार पीला पहनकर, केले का भोग लगाकर और यह आरती सच्चे मन से गाकर देखिए।

जो भी एक बार सच्ची श्रद्धा से बृहस्पति देव की शरण लेता है — उनकी कृपा जीवन में हमेशा बनी रहती है। धन आता है, रिश्ते बनते हैं, रुका हुआ काम बनता है।

बस हर गुरुवार याद रखिए — “जय बृहस्पति देवा!”

जय बृहस्पति देव 🙏 जय विष्णु भगवान


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