Satyanarayan Aarti — जय लक्ष्मी रमणा | पूरी Lyrics, अर्थ और पूजा विधि
घर में कोई शुभ काम हो, नई गाड़ी आए, बच्चे का जन्म हो, परीक्षा में सफलता मिले या बस यूं ही भगवान का शुक्रिया अदा करना हो — हर मौके पर एक ही आयोजन होता है — सत्यनारायण कथा। और जब कथा के बाद वो आरती शुरू होती है — “जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा” — तो पूरे घर का माहौल बदल जाता है। एक दिव्य ऊर्जा, एक अलग सुकून, एक अजीब शांति। लेकिन क्या आप जानते हैं इस Satyanarayan Aarti का असली अर्थ क्या है? इसे कैसे और कब करना चाहिए? और इस आरती की हर पंक्ति में क्या गहरा भाव छुपा है? अगर नहीं जानते — तो यह पोस्ट अंत तक पढ़िए। पूरी lyrics, सरल अर्थ, पूजा विधि — सब कुछ एक जगह।
Satyanarayan Aarti क्या है?
सत्यनारायण आरती भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की स्तुति है। “सत्य” यानी सत्य का स्वरूप और “नारायण” यानी सबके पालनहार। यानी — जो सत्य है, वही नारायण है।
यह आरती सत्यनारायण कथा के समापन पर गाई जाती है। स्कंद पुराण के रेवाखंड में इस कथा का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु ने स्वयं नारद मुनि को यह व्रत और आरती का महत्व बताया था।
Satyanarayan Aarti गाने से —
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
- व्यापार और नौकरी में तरक्की होती है
- विवाह की रुकावटें दूर होती हैं
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- हर मनोकामना पूर्ण होती है
Table of Contents
Satyanarayan Aarti — पूरी Lyrics हिंदी में
॥ जय लक्ष्मी रमणा ॥
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
रत्नजड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे ।
नारद करत निरंतर, वीणा लिए साजे ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
वेद पुराण पढ़त, शुक सनकादि गावें ।
ब्रह्मा देव सब मिलकर, स्वागत हैं करते ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
प्रकट भए कलयुग में, आप लिया अवतारा ।
सुखसागर तुम ठाकुर, सब जीव के तारा ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
गोपाल गोविंद गोकुल, धेनुपाल दाता ।
जय नंद के नंदन, माता यशोदा माता ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
नानाविध फल सुंदर, दिए प्रभु मेवा ।
पीत वस्त्र त्रिभुज नयन, मस्तक पर सेवा ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
दही चिउड़ा भोग लगे, केला तुलसी चंदन ।
धूप दीप और कर्पूर, प्रभु करें स्वीकारण ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
जो कोई नर गावे, व्रत यह धारे ।
अंत समय वैकुंठ को, जाय नर सुखारे ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥
जय लक्ष्मी रमणा ॥
दूसरी प्रसिद्ध सत्यनारायण आरती
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति ।
किस विध मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
दीनबंधु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे ॥
Satyanarayan Aarti का सरल अर्थ
“जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा”
हे लक्ष्मी के प्रिय! हे सत्यनारायण स्वामी! आपकी जय हो। आप भक्तों के सभी पापों को हरने वाले हैं।
“रत्नजड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे”
आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर विराजमान हैं। आपकी छवि अद्भुत और मनमोहक है। नारद मुनि निरंतर वीणा बजाते हुए आपकी स्तुति करते हैं।
“वेद पुराण पढ़त शुक सनकादि गावें”
शुकदेव मुनि और सनक आदि ऋषि वेद-पुराण पढ़ते हुए आपकी स्तुति गाते हैं। ब्रह्मा और सभी देवता आपका स्वागत करते हैं।
“प्रकट भए कलयुग में, आप लिया अवतारा”
कलियुग में आपने सत्यनारायण के रूप में अवतार लिया। आप सुख के सागर हैं और सभी जीवों का उद्धार करने वाले हैं।
“दही चिउड़ा भोग लगे, केला तुलसी चंदन”
आपको दही, चिउड़ा, केला, तुलसी और चंदन का भोग अर्पित किया जाता है। धूप, दीपक और कर्पूर से आपकी आरती होती है।
“जो कोई नर गावे, व्रत यह धारे”
जो भी इस आरती को गाता है और यह व्रत करता है — वो अंत में वैकुंठ को जाता है।
“ॐ जय जगदीश हरे — भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे”
हे जगत के स्वामी! आप भक्तों के सभी संकट क्षण भर में दूर कर देते हैं।
“मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी”
आप ही मेरे माता-पिता हैं। आपके सिवाय मैं किसकी शरण लूं? आपके बिना कोई दूसरा नहीं।
“तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा”
यह आरती की सबसे गहरी पंक्ति है। सब कुछ आपका ही है — तन, मन, धन सब। जो आपका है उसे ही आपको अर्पित कर रहा हूं।
Satyanarayan Aarti की सही पूजा विधि
सही समय
- पूर्णिमा — सबसे उत्तम और पवित्र
- एकादशी — विष्णु भगवान का प्रिय दिन
- गुरुवार — साप्ताहिक पूजा
- शुभ अवसरों पर — गृह प्रवेश, विवाह, जन्म, सफलता
पूजा सामग्री
- शुद्ध घी का दीपक
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- तुलसी दल — अनिवार्य
- दही और चिउड़ा — सत्यनारायण का प्रिय भोग
- पीले फूल और गेंदा
- पंचमेवा और केला
- कर्पूर और अगरबत्ती
Step by Step विधि
- गुरुवार या पूर्णिमा को स्नान करके पीले वस्त्र पहनें
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
- भगवान सत्यनारायण की तस्वीर या शालिग्राम स्थापित करें
- पंचामृत से अभिषेक करें
- तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें
- दही-चिउड़ा और केले का भोग लगाएं
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जप करें
- सत्यनारायण कथा सुनें या पढ़ें
- पूरी Satyanarayan Aarti भावपूर्वक गाएं
- प्रसाद सभी में वितरण करें
ध्यान रखें
- प्रसाद में केला और पंचामृत अवश्य रखें
- पूजा के बाद प्रसाद सभी को दें — किसी को मना न करें
- तुलसी दल के बिना भोग अधूरा है
- कथा सुनते समय बीच में न उठें
किन अवसरों पर Satyanarayan Aarti विशेष रूप से करें
| अवसर | महत्व |
|---|---|
| पूर्णिमा व्रत | सबसे पवित्र — मनोकामना पूर्ति |
| गृह प्रवेश | घर में सुख-समृद्धि के लिए |
| विवाह के बाद | नए जीवन की शुभ शुरुआत |
| नई नौकरी या व्यापार | सफलता और तरक्की |
| संतान जन्म पर | बच्चे की लंबी उम्र |
| परीक्षा में सफलता | आभार प्रकट करने के लिए |
| मनोकामना पूर्ण होने पर | वादा निभाने के लिए |
सत्यनारायण व्रत की कथा — संक्षेप में
स्कंद पुराण के अनुसार एक बार नारद मुनि ने भगवान विष्णु से पूछा — “हे प्रभु! कलियुग में मनुष्य की मुक्ति का सरल उपाय क्या है?”
तब भगवान विष्णु ने सत्यनारायण व्रत का विधान बताया। कहा — “जो भी इस व्रत को करेगा, इस आरती को गाएगा — उसकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। धन, संतान, सुख, मोक्ष — सब मिलेगा।”
पुराणों में कई कथाएं हैं जहाँ इस व्रत की महिमा से गरीब साधुओं को धन मिला, बांझ स्त्रियों को संतान मिली और राजाओं को खोया हुआ राज्य वापस मिला।
निष्कर्ष
Satyanarayan Aarti गाना सिर्फ एक परंपरा नहीं — यह भगवान विष्णु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे सुंदर तरीका है। जब आप “जय लक्ष्मी रमणा” गाते हैं — तो आप सिर्फ शब्द नहीं बोलते, आप उस परमशक्ति को धन्यवाद देते हैं जिसने आपको यह जीवन, यह परिवार और यह सुख दिया है।
हर पूर्णिमा को एक बार यह आरती जरूर गाएं। भगवान सत्यनारायण की कृपा आप पर और आपके पूरे परिवार पर सदा बनी रहे।
जय सत्यनारायण भगवान 🙏 जय लक्ष्मी रमणा 🙏
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