सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची | पूरी Lyrics, अर्थ और पाठ विधि
हर पूजा की शुरुआत उन्हीं से होती है। हर मंगल कार्य में उनका नाम पहले लिया जाता है। घर हो, मंदिर हो, दफ्तर हो या विद्यालय — जहाँ भी कोई नया काम शुरू होता है, वहाँ सबसे पहले एक ही नाम गूंजता है — गणपति बाप्पा मोरया! और जब Ganpati Aarti शुरू होती है — “सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची” — तो मन की सारी उलझनें, सारी चिंताएं, सारे डर एक पल में गायब हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इस आरती का असली अर्थ क्या है? इसे किसने लिखा? और सही तरीके से कैसे करें इसका पाठ? अगर नहीं जानते — तो यह पोस्ट पूरी पढ़िए। यहाँ आपको मिलेगा वो सब कुछ जो आपने पहले कभी एक जगह नहीं पाया।
Ganpati Aarti क्या है और किसने लिखी?
Ganpati Aarti — जिसे “सुखकर्ता दुखहर्ता” भी कहते हैं — यह महाराष्ट्र के महान संत श्री समर्थ रामदास स्वामी द्वारा रचित है। ये वही संत हैं जो छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु थे।
यह आरती मराठी भाषा में लिखी गई है लेकिन आज पूरे भारत में — हिंदी, मराठी, गुजराती, हर भाषा के भक्त इसे उतने ही श्रद्धा से गाते हैं।
Ganpati Aarti की खास बात यह है कि इसमें गणेश जी के हर रूप का, हर गुण का, हर शक्ति का वर्णन है। यह आरती गाना सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं — यह एक आध्यात्मिक अनुभव है।
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Ganpati Aarti गाने के फायदे क्या हैं?
शास्त्रों में गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है — यानी सभी बाधाओं को हरने वाले। जो भी सच्चे मन से Ganpati Aarti गाता है उसे मिलता है —
- हर काम में सफलता और शुभ परिणाम
- घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश
- बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि
- आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति
- परिवार में सुख-शांति और एकता
- विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता
- मंगल कार्यों में आने वाली रुकावटों का अंत
Ganpati Aarti — पूरी Lyrics हिंदी में
॥ सुखकर्ता दुखहर्ता ॥
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती ॥ (धृपद)
जय देव जय देव ।
रक्त वर्ण तनु डोळे त्रिनयन ।
सोंड वाकडी तेथें मिरवे वदन ॥
डोई मिरवतसे मुकुट जडित रत्न ।
खांद्यावरी शोभतसे दिव्य यज्ञोपवीत ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती ॥
पुढे रिद्धि-सिद्धि योगिनी जगदंबा ।
मागे मोरया गोसावी पिता दिगंबा ॥
नारद तुंबर गाती धरूनी विणा ।
भक्त मेळे अवघे करिती पूजना ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती ॥
अष्टौ भुजा तव शोभती हाती ।
शस्त्र धरूनी ते शत्रु संहाराती ॥
मोदक लाडू प्रिय तुला श्रीपती ।
महिमा तुझा न कळे जगती ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती ॥
मंत्रपुष्प
ॐ गं गणपतये नमः ।
श्री सिद्धिविनायक नमः ।
अष्टविनायक नमः ।
गणपति बाप्पा मोरया ।
मंगलमूर्ती मोरया ॥
Ganpati Aarti का सरल हिंदी अर्थ
“सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची”
सुखकर्ता — सुख देने वाले
दुखहर्ता — दुख हरने वाले
वार्ता विघ्नाची — विघ्नों की बाधाओं को दूर करने वाले
अर्थ: हे गणपति! आप सुख देने वाले, दुख हरने वाले और सभी विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
“नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची”
अर्थ: आपकी कृपा और प्रेम से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
“सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची”
अर्थ: आपके पूरे शरीर पर सिंदूर का लेप है जो आपको सर्वांग सुंदर बनाता है।
“कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची”
अर्थ: आपके कंठ में मोतियों की माला चमक रही है।
“दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती”
यह पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है — सिर्फ दर्शन मात्र से मन की सारी कामनाएं पूरी हो जाती हैं।
“रक्त वर्ण तनु डोळे त्रिनयन”
अर्थ: आपका शरीर लाल रंग का है, तीन नेत्र हैं और सूंड थोड़ी वक्र है — यही आपका मनमोहक स्वरूप है।
“पुढे रिद्धि-सिद्धि योगिनी जगदंबा”
अर्थ: आपके आगे रिद्धि-सिद्धि और पीछे पिता महादेव (दिगंबर) विराजमान हैं। नारद और तुंबर वीणा बजाते हुए आपकी स्तुति गाते हैं।
Ganpati Aarti की सही विधि — इस तरह करें पूजा
सही समय
- सुबह — सूर्योदय के बाद ब्रह्म मुहूर्त में
- शाम — सूर्यास्त के समय संध्या आरती
- गणेश चतुर्थी — दिन में 5 बार आरती
सही सामग्री
- शुद्ध घी का दीपक या कपूर की लौ
- लाल और पीले फूल — विशेषतः गेंदा और लाल कनेर
- दूर्वा (तीन पत्ती वाली घास) — गणेश जी को सबसे प्रिय
- मोदक या बेसन के लड्डू
- सिंदूर और चंदन
- पान का बीड़ा
पाठ विधि — Step by Step
- स्नान करके स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र पहनें
- गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं
- “ॐ गं गणपतये नमः” का 21 बार जप करें
- दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें
- मोदक का भोग लगाएं
- पूरी Ganpati Aarti भावपूर्वक गाएं
- अंत में “गणपति बाप्पा मोरया” का उद्घोष करें
किन अवसरों पर Ganpati Aarti अवश्य गाएं
| अवसर | विशेष महत्व |
|---|---|
| गणेश चतुर्थी | सबसे पवित्र — 10 दिन आरती |
| बुधवार | गणेश जी का प्रिय दिन |
| नया काम शुरू करने से पहले | विघ्न नाश |
| परीक्षा से पहले | बुद्धि और एकाग्रता |
| गृह प्रवेश | घर में सुख-शांति |
| विवाह संस्कार | मंगल शुरुआत |
| व्यापार शुरू करते समय | सफलता और समृद्धि |
गणेश जी के 12 प्रमुख नाम — जो Aarti में गूंजते हैं
Ganpati Aarti में गणेश जी के जिन नामों का भाव छुपा है, उन्हें जानना जरूरी है —
गणेश — गणों के स्वामी, विनायक — सर्वश्रेष्ठ नायक, विघ्नहर्ता — बाधाओं को हरने वाले, लंबोदर — बड़े पेट वाले, गजानन — हाथी के मुख वाले, एकदंत — एक दांत वाले, मोदकप्रिय — मोदक को प्रिय मानने वाले, सिद्धिविनायक — सिद्धि देने वाले, मंगलमूर्ति — मंगल के स्वरूप, वक्रतुंड — वक्र सूंड वाले, हेरंब — माँ का प्रिय पुत्र, धूम्रकेतु — धूम्र रंग की ध्वजा वाले।
निष्कर्ष
Ganpati Aarti — “सुखकर्ता दुखहर्ता” — यह सिर्फ एक आरती नहीं, यह जीवन का सार है। जहाँ गणपति हैं — वहाँ विघ्न नहीं। जहाँ यह आरती गूंजती है — वहाँ नकारात्मकता टिक नहीं सकती।
हर रोज सुबह उठकर सिर्फ एक बार — “जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती” — यह कहिए। देखिए कैसे आपका पूरा दिन बदल जाता है।
गणपति बाप्पा मोरया 🙏 मंगलमूर्ती मोरया 🙏
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